विगत कई वर्षों से गीता दी ( गीता डूबे) और शिप्रा दी ( डॉ शिप्रा मिश्रा) मुझे हिंदी मेले के विषय में बताती रही थी,और दोनों विभूतियों का यही प्रश्न था कि "आप हिंदी मेला क्यों नहीं जाती हो' | क्योंकि नौकरी पेशा, शिक्षिका हूं तो घर की जिम्मेदारियां अपने कर्म क्षेत्र की जिम्मेदारी मुझे रोकती रही | सौभाग्यवश इस वर्ष मुझे इस मेले में शिरकत करने का समय और अवसर भी मिल गया | हिंदी मेला की सदस्यता प्राप्त करके हिंदी मेले में जाना प्रारंभ किया कई कार्यक्रमों की रूपरेखा मैंने देखा, और सभी को इन कार्यक्रमों की तैयारी बड़े ही लग्न के साथ करते हुए देखा , इस मेले में बड़े-बड़े साहित्यकारों का जमावड़ा देखा और क्योंकि 26 तारीख को यह कार्यक्रम प्रारंभ होने वाला था और 1 जनवरी तक यह कार्यक्रम चलता तो 26 को मेरी एक और कार्यक्रम थी रिसड़ा में जिसके कारण में प्रथम दिवस मेले में उपस्थित नहीं रह सकी, किंतु उसके बाद 27 दिसंबर 2025 से मैं लगातार प्रतिदिन मेले में शिरकत करती रही | उसके समापन दिवस तक भी मेले में मेरी उपस्थित रही, हालांकि ज्यादा देर तक रुक ना सकी | कोलकाता के विद्यालयों में शिक्ष...
स्वेता की रचनाएँ मेरी स्वयं की लिखी रचनाएँ है जो अप्रकाशित है | स्वेता की रचनाएँ मेरे मन के भाव है जो मैंने शब्दों में पिरो कर आप सभी के समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ | स्वेता की रचनाएँ पटल पर आने वाले और मेरी रचनाओं को पढ़ने वाले सभी पाठको का कोटिश आभार धन्यवाद |