गूंगे बहरे अँधे हाँ! हम गूंगे बहरे और अँधे हो चुके है | हम अँधे है क्योंकि साक्षात् सामने देखकर भी हम अनदेखा करने लगे है | हम गूंगे है क्योंकि सच बोलने से परहेज करते है और बहरे इसलिए, क्योंकि चीखो को अनसुना करने लगे है | कैसी स्थिति बन गई है हमारे देश की, एक तरफ तो हम चंद्रयान - 3 की सफलता का उत्सव मना रहे हैं और एक तरफ मणिपुर के नृशंश स्थिति से रूबरू हो रहे है | मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा कि हजारों की भीड़ में वीडियो बनाने वाले को वायरल करने की हिम्मत है, पर बचाने की हिम्मत नहीं | कुछ समय पहले एक वाकया दिल्ली में भी हुआ था, जिसका जिम्मेदार सोशल मीडिया और हमारे बच्चियों को दी गई आजादी को ठहराया गया | हमें स्वच्छंद नहीं बंदिशों में रहने की सीख दी गई| पर अब क्या? यह मणिपुर की घटना पर इतनी शांति कैसे है? सबसे बड़ी बेशर्मी तो उनकी दिखती है जो, पीड़िता से मिलने पूरी मिडिया और लाव लश्कर के साथ जाते हैं| दिखावा करते हैं कि हम तुम्हारे साथ हैं! अगर आप लाव लश्कर ले जाने की हिम्मत रखते हैं,पूरी मीडिया ले जाने की हिम्मत रखते हैं तो,न्याय की व्यवस्था में इतनी देरी क्यों...
स्वेता की रचनाएँ मेरी स्वयं की लिखी रचनाएँ है जो अप्रकाशित है | स्वेता की रचनाएँ मेरे मन के भाव है जो मैंने शब्दों में पिरो कर आप सभी के समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ | स्वेता की रचनाएँ पटल पर आने वाले और मेरी रचनाओं को पढ़ने वाले सभी पाठको का कोटिश आभार धन्यवाद |