आभासी पटल बड़ा मजेदार लगता है| फेसबुक, इंस्टाग्राम,युटुब आदि जाने ही कितने आभासी पटल है,जिसमें मैं अक्सर देखती हूं लोग अपने खाने के, घूमने के अक्सर फोटो डालते रहते हैं | क्या यह निजता का हनन नहीं है? ये प्रश्न बार-बार मेरे मन में कौंधता रहता है | एक अंग्रेजी में शब्द है privacy क्या य इस शब्द की महत्ता रही हमारे जीवन में | हम अक्सर इन मीडिया प्लेटफॉर्म पर देखते हैं कि लोग दिनचर्या के भी वीडियो और फोटोस डालते रहते हैं, क्या यह सही है? कि हम अपनी दैनिक क्रिया को भी इन मीडिया प्लेटफॉर्म पर मनोरंजन के रूप में डालें, क्या हम मनोरंजन के पात्र बनकर रह गए हैं? लाइक, कॉमेंट्स और फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए हम भूल गए हैं की एक समय था जब लोग हमें जानने के लिए हमें पहचानने के लिए हमसे मिलने आते थे, वार्तालाप होते थे, परिचर्चाऐं होती थी| किंतु यह बहुत ही अफसोस की बात है कि अब हम लोगों के जीवन को मीडिया प्लेटफॉर्म पर मनोरंजन के रूप में देखने लगे हैं| कहां रही हमारी निजता और क्या हमारा निजी जीवन केवल और केवल मनोरंजन का साधन मात्र बनकर रह गया | यह विचार मेरे खुद के हैं और यह विचार बार-बार मेरे ...
स्वेता की रचनाएँ मेरी स्वयं की लिखी रचनाएँ है जो अप्रकाशित है | स्वेता की रचनाएँ मेरे मन के भाव है जो मैंने शब्दों में पिरो कर आप सभी के समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ | स्वेता की रचनाएँ पटल पर आने वाले और मेरी रचनाओं को पढ़ने वाले सभी पाठको का कोटिश आभार धन्यवाद |