विभा बहुत परेशान है,बगल में चाची जी के फ़्लैट से बहुत जोर की बदबू आ रही है | वह बिल्डिंग के सेक्रेटरी के पास जाकर शिकायत करती है कि घर के बगल में रहनेवाली उसकी चिड़चीड़ी चाची के फ़्लैट से बहुत जोर की बदबू आ रही है | सेक्रेटरी के पास और भी लोग इस बात की शिकायत लेकर पहुंचे हुए थे |सेक्रेटरी आनन -फानन में इस बात का पता लगाने के लिए चाची जी के घर का दरवाजा जोर-जोर से खटखटाते हैं| बैल भी बजाते हैं,पर दरवाजा नहीं खुलता | दरवाजा भीतर से बंद है, दरवाजे के बाहर रोज का अखबार दूध की तीन चार बोतलें ऐसे ही पड़े हुए हैं | सेक्रेटरी को ना जाने क्या सूझता है,वह तुरंत पुलिस को कॉल करते हैं| पुलिस आती और दरवाजा तोड़ दिया जाता है | अंदर का नजारा देखकर सभी स्तब्ध रह जाते हैं | चाची जी कुर्सी पर लुढ़की हुई मृत पाई जाती है | विभा को काटो तो खून नहीं मन में जाने कौन सा रंज बैठा कर उसने चाची जी से बात करना छोड़ दिया था | चाची जी अकेली,कोई संतान नहीं | अकेली ही वहां रहती थी | यही कारण था कि उनसे कोई बात करने वाला नहीं था | चिड़चिड़ी हो गई थी बुढ़ापे के कारण,चाचाजी भी वर्षों पहले परलोक सिधार गए थे...
स्वेता की रचनाएँ मेरी स्वयं की लिखी रचनाएँ है जो अप्रकाशित है | स्वेता की रचनाएँ मेरे मन के भाव है जो मैंने शब्दों में पिरो कर आप सभी के समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ | स्वेता की रचनाएँ पटल पर आने वाले और मेरी रचनाओं को पढ़ने वाले सभी पाठको का कोटिश आभार धन्यवाद |