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सच जरुरी क्यों है?

  सच का अर्थ है, जो यथार्थ हो! सच से रूबरू होना जरूरी भी है | सच को जानने व समझने का इस धरती पर सभी को समान रूप से अधिकार भी दिया गया है | हमें सच जानने का हक है |  हो भी क्यों ना, सच्चाई मनुष्य के हर उस पक्ष को हमारे सामने प्रस्तुत करती है, जिससे हम  अनभिज्ञ रहते हैं |  परंतु उस सच का क्या जिसे जानने के बाद रोष पैदा हो, रोष भी ऐसा वैसा नहीं, ज्वलनशील पदार्थ की तरह हवाओं में इस प्रकार से घुल जाए जो आग पैदा करें आग | हमें किस प्रकार का सच बताया जा रहा है, या जताया जा रहा है यह उस बात पर निर्भर करता है कि, आखिर वह सच क्या है?कैसा है?  वर्तमान परिपेक्ष्य में देखा जाए तो हम सच दिखाने और बताने के लिए इतने आतुर हो चुके हैं कि,सच की परिभाषा को तोड़ मरोड़ कर अपने फायदे के लिए नमक मिर्च के मसाले के साथ परोस रहे हैं| किसलिए परोस रहे हैं हमें नहीं पता| बस ज्वलंत मुद्दा है, उठाना है,उसे समाज के सामने पहुंचना है, चिंगारी को आग में बदलना है,और खड़े होकर तमाशा देखना है| तमाशा का लुत्फ़ उठाना है| समाज का वह तबका जिसे हम बुद्धिजीवी कहते हैं उनकी चुप्पी बड़ा विचलित करती है|  ...