रोज करते याद अब हम आपको,
पीर कैसे हम बताएं आपको....!
दिल में मेरे बसाया था जहां,
धड़कने उठती वहाँ बनके शमा!
जो रहे अरमा जताना आपको,
टूटकर चाहा बताना आपको!
रोज करते याद अब हम आपको,
पीर कैसे हम बताएं आपको....!
प्रेम तुमसे है जताया ना कभी,
दिल्लगी तुमको बताया ना सभी!
प्रेम सच में जीत था ना हार भी,
अब कहीं जाना सनम हम आपको!
रोज करते याद अब हम आपको,
पीर कैसे हम बताएं आपको.....!
स्वेता गुप्ता "स्वेतांबरी"(कोलकाता)
स्वरचित /मौलिक

nice, beautiful
जवाब देंहटाएंसुपर
जवाब देंहटाएं