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नवरात्रि "" माँ के नौ रूप""



नवरात्र " माँ के नौ रूप "




" प्रथमा शैलपुत्री " 
मां पर्वतराज पुत्री, 
एक हाथ त्रिशूल विराजे, 
दूजे में कमल पुष्प, 
नवदुर्गा में प्रथमा दुर्गा, 
योग साधना का दिखाएं रूप !

" द्वितीय ब्रह्मचारिणी " 
अत्यंत भव्य ज्योतिर्मय रूप, 
मां तप आचरण करने वाली, 
जप की माला कमंडल ले, 
त्याग वैराग्य का देती स्वरूप !

" तृतीय चंद्रघंटा "
 मस्तक अर्धचंद्र विराजे, 
 सिंह वाहिनी स्वर्ण मुखी मां, 
 कष्टों को हर लेती मैया, 
 उपासना की देती अनुकंपा !

" चतुर्थी कुष्मांडा"
 मृदुल मुस्कान ब्रह्मा उत्पन्नी, 
 भवसागर का दिखाती मार्ग, 
 सुगम श्रेयस्कर अलौकिक, 
 सुख को देने वाली समृद्धि, 
 उन्नति की देती अनुकंपा !

" पंचमा स्कंदमाता " 
कमल आसन विराजने वाली, 
पद्मासन देवी कहलाती, 
कार्तिकेय की माता, 
साधक को देती आशीष !


" षष्टी कात्यायनी "
अमोघ फलदायनी, 
कठिन तप ऋषि घर जन्मी, 
अलौकिक तेज की स्वामिनी, 
सहजता का देती अनुकंपा !


" सप्तम कालरात्रि "
रूप कराली शुभड्करी, 
सिद्दी की देवी, 
दुष्ट विनाशिनी, 
देती भयमुक्त जीवन का आशीष !

 " अष्टमां महागौरी "
शक्ति अमोघ फलदायिनी, 
पाप विनाशिनी, 
दैत्यों का मर्दन करने वाली, 
अक्षय पुण्य का देती अनुकंपा !

" नवम सिद्धिदात्री "
सिद्ध प्रदायिनी, 
मनोकामना पूर्ण करती, 
नैवेद्य भोग थाल सजा, 
भक्तों को देती सर्वसुख अनुकंपा !

स्वेता गुप्ता "स्वेतांबरी"(कोलकाता)
स्वरचित / मौलिक 

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