निज भाषा विश्वास जगाती हिंदी,
सहज, शब्द, अतुल्य भंडार ये हिंदी !
हजारों वर्ष पुरानी अपभृंश ये हिंदी,
नीति, श्रृंगार, शौर्य की हिंदी !
आर्यों की परिभाषित हिंदी,
अवहट्ट, चंद्रधर गुलेरी की हिंदी !
आदिकाल,भक्तिकाल,आधुनिक काल की हिंदी,
खड़ी बोली इतिहास की हिंदी!
तुलसी, जायसी कवियों की हिंदी,
मीरा की भक्ति में हिंदी!
सूर के पद हो या दोहे कबीर के,
समाज को दिशा दिखाती हिंदी!
लघुकथा, उपन्यास, मुक्तक सी हिंदी,
भारतेंदु, निराला, प्रेमचंद की हिंदी!
गौरव गाथा सरल बना,
जन जन तक पहुंचाती हिंदी!
शौरसेनी, अर्धमागधी से प्रकटी हिंदी,
राष्ट्रभाषा हमारी हिंदी....!
स्वेता गुप्ता "स्वेतांबरी"
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