एक साहित्यकार समाज में हो रहे राजनैतिक, सामाजिक परिस्थितियों को, अपने मनोभावों को रचनाओं के माध्यम से सजा कर प्रस्तुत करता है | समाज में घटित घटनाओ पर चिंतन मनन कर अपने विचारों को अपनी लेखनी द्वारा प्रस्तुत करता है| पर आज के वर्तमान समय में कितने साहित्यकार और कवि है जिनमे एक होड़ सी लगी है |आगे बढ़नेके क्रम में उन्हें कविता की गुणवत्ता से कम मान पत्रों पर ज्यादा विशेष ध्यान रहने लगा है| या यूं कहें कि साहित्य क्षेत्र का पायदान धरातल की तरफ जाता जा रहा है | अभी करोना के समय में जिस प्रकार से साहित्य को एक मीडिया प्लेटफॉर्म मिला है, यह एक सकारात्मक पक्ष कह सकते हैं| जिसमें बहुत से लोग जो इन क्षेत्रों से जुड़े हो कर भी कलमकारी से दूर थे |अब इस मीडिया प्लेटफॉर्म के द्वारा उन्हें साहित्य से जुड़ने का अवसर मिला है |अपनी लेखनी अपनी रचनाओं को पटल पर विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिला है | परंतु नकारात्मक पक्ष भी है कि मीडिया प्लेटफॉर्म में किस प्रकार से एक ही विषय पर एक ही रचनाकार दो तीन रचनाएं लिखते हैं, और उसी विषय पर और भी कई रचनाकार अपनी रचनाएं प्रस्तुत ...
स्वेता की रचनाएँ मेरी स्वयं की लिखी रचनाएँ है जो अप्रकाशित है | स्वेता की रचनाएँ मेरे मन के भाव है जो मैंने शब्दों में पिरो कर आप सभी के समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ | स्वेता की रचनाएँ पटल पर आने वाले और मेरी रचनाओं को पढ़ने वाले सभी पाठको का कोटिश आभार धन्यवाद |