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भ्रांतियाँ

हम भटकाव की तरफ जा रहे हैं| यह भटकन ऐसी है जिसका कोई ओर है ना छोर |अब मेरे इस कथन का आपको मैं सार समझाती हूं |सर्वप्रथम देश में हो रहे घटनाओं को अपने निजी लाभ के लिए तोड़ मरोड़ कर दूसरी दिशा देते हुए आम लोगों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है|
बिना किसी घटना के तह तक गए, बिना उस घटना से संबंधित सत्यता की जांच किए हम आम लोगों के सामने ऐसे कथनों को प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे मानव भटक रहा है |अब हालात इस तरह से बिगड़ रहे हैं कि विश्वास कमजोर होता जा रहा है| 
अब हाथरस की घटनाओं को ही ले लें , समाचार से संबंधित चैनलों को देखें हर चैनल के अपने नियम हैं, हर चैनल उस घटना को अपने तरीके से प्रस्तुत कर रहा है |उन्हें टीआरपी चाहिए, उन्हें अपना चैनल को सबसे ऊंचे पायदान पर चाहिए| प्रतिस्पर्धा चैनलों के बीच इतनी बढ़ गई है कि अगर घटना सच्ची है, तो भी आपसी प्रतिस्पर्धा के कारण एक घटना को सत्य बताएगा, तो दूसरा घटना से संबंधित बातों को इस तरह से तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत करेगा जैसे कि वह घटना सत्य नहीं असत्य है| अब इस करोना काल के समय में अधिकाधिक मानव अपने घर में हैं, और इन्हीं न्यूज़ चैनलों में वह अपने देश में हो रही घटनाओं को सुन और समझ रहे है |पर इससे तो देश सम्बंधित समाचारो पर भरोसा उठता जा रहा है| किस पर विश्वास करें,कोई कहता है,  यह घटना राजनीतिक लाभ के लिए है, एक कहता है कि मुआवजे की रकम के लिए है |अगर घटना सच में घटी भी हुई होगी, तो इस तरह की भ्रांतियों से यह होगा कि आम लोग इस तरह की घटनाओं पर विश्वास करना ही छोड़ देंगे |अगर सच में किसी लड़की के साथ इस तरह का वीभत्स घटना घटित होती भी है,  तो लोग कहेंगे कि,यह तो कोई राजनीतिक लाभ के लिए या मुआवजे की रकम के लिए है | इस प्रकार से सच्ची घटना का भ्रान्तिक प्रचार किया जा रहा है |लोग इससे भ्रांतियों में फंसते जा रहे हैं, यह कैसा समाज हम बना रहे हैं, हम भविष्य के लिए किस तरह का पथ बना रहे हैं|
इसी प्रकार भारत चीन सीमा पर हुए विवाद के लिए इसी प्रकार भ्रांतियाँ फैलाई गई, कहा गया कि  चीन ने हमारे सीमा का आधीग्रहणकर लिया था और हमारे सीमा के नियमों का उल्लंघन कर रहा थे | इस प्रकार की भ्रांतियां फैलाई गई हम किस तरह की विचारधारा रख रहे हैं कि हम अपने देश के प्रति ही विश्वास नहीं रख रहे हैं, ऐसी घटना जिसका हमारे देश की मान मर्यादा पर असर पड़ सकता है,  हम इन घटनाओं पर भी अपनी टीका टिप्पणी दे रहे हैं जो की बहुत ही नाजुक मामला है| 
हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हमें इस तरह की भ्रांतियां से दूर रहना है | हम एक शिक्षित समाज से संबंध रखते हैं, हमें अपनी सोच समझ और विचारधारा पर विश्वास करना चाहिए,  ना की भ्रांतियों पर| ताकि हमारी देश की संप्रभुता और सम्मान पर कोई आंच न आ सके|
स्वेता गुप्ता "स्वेतांबरी"(कोलकाता)
स्वरचित / मौलिक 

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